सोमवार, 3 अगस्त 2009

भूख

भूख

कल रात ...
गरीब बस्ती से उठी...
बच्चे की आवाज
भूख.....भूख....
मन में सवाल उठा ..
क्या है भूख?
एक आंतरिक आग?
जिसे बुझाने के लिए...
किसान खेत में हल चलाता है...
मछुआरा जल में जाल डालता है...
मजदूर धूप में सड़क बनाता है...
पसीना बहाते हैं लोग...
और तब आता है आटा
भूख को मिटाने के लिए सेकीं जाती हैं रोटियां....
और फिर बुझती है ये आग...
फिर वे कौन लोग हैं? .......
जो बिना मेहनत के....
रोटियां भी सेक लेते हैं....
और उनकी भूख भी मिट जाती है....
मन में उठा एक नया सवाल...
क्या कई तरह की होती है?
" भूख"
वल्लभ... फ़रवरी...१९९१

2 टिप्‍पणियां:

govind ने कहा…

Bahut khoob bhookh ki khubsurti hai yaa atank kafi marmik evam gahan chintaniye abhivyakti hai iss par aapki kavita evam isaki bhavana ko Jan Kavi Dhoomil ki kavita prerana srot hai.
"Ek Adami hai jo Roti Belta hai,
Doosara Adami Hai jo Roti Senkata hai,
Teesara Adami hai jo na Roti Belta hai aur na hi Senkata hai ,Woh Roti se Khelta hai
Woh Teesara Adami Kaun Hai ,
Main Poonchhata hoon Mere Desh Ki Sansad Maun Kyoon hai ???????????? "

Rajesh Verma ने कहा…

mujhe v is wakya ka arth chahie
assignment me likhna hai
arth jante hai to jaroor likhe ya mujhe email kre
rajeshverma456.rv@gmail.com