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सोमवार, 27 जुलाई 2009

जान की कीमत

जान की कीमत

आज फिर हो गई एक ट्रेन दुर्घटना.......
सैकडों मरे ......इतने ही घायल...
कई कलाइयाँ सूनी हो गई
कितने ही बेसहारा हो गए.....
कटी फटी लाशें ....
विकृत चेहरे ....
जमा लोग....
अपनों को खोजती निगाहें....
राहत कार्य के नाम पर...
हाथ की घडियां और पाकेट का पर्स
निकालने वाले लोगों की सक्रियता....
इतने में कारों का काफिला आया....
सबने कहा....
शायद मंत्री जी आये हैं...
हाँ.. वे ही हैं......
उन्होंने जाँच समिति गठित करने का दिया आश्वासन......
और मरने वालों के परिवारों को...
पचास पचास हजार का चेक ....
क्या यही है देश में...
नागरिकों के
"जान की कीमत"
वल्लभ... मई, सन् 1990