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गुरुवार, 13 अगस्त 2009

''एक पागल''


सड़क पर घूम रहा है...
एक इंसान.....
मस्त है अपनी धुन में....
किसी से कोई शिकवा - शिकायत नही है उसे....
शायद, किसी से प्यार भी नही....
बेखबर है..........

कि दुनिया में लूट, डकैती और मार काट मची है......
अनजान है ........

कि चारों ओर,
भ्रष्टाचार और अराजकता व्याप्त है....
उसे क्या लेना देना इन सब से ?
वह तो ढूंढ़ रहा है...
एक अनजान मंजिल.
वह हँसता है हम पर.....
शायद , यह सोच कर....
कैसे 'पागल' हैं ये लोग.....
जो...
लड़ रहे हैं जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय
के नाम पर....
आकंठ डूबे हुए हैं ये लोग.....
रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में....


लेकिन॥
हमारा सभ्य समाज...
उस इंसान को कह रहा है ...
वो देखो...
"एक पागल'' ................................वल्लभ ( सितम्बर ९०)