भावनाए लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भावनाए लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 27 जुलाई 2009

जान की कीमत

जान की कीमत

आज फिर हो गई एक ट्रेन दुर्घटना.......
सैकडों मरे ......इतने ही घायल...
कई कलाइयाँ सूनी हो गई
कितने ही बेसहारा हो गए.....
कटी फटी लाशें ....
विकृत चेहरे ....
जमा लोग....
अपनों को खोजती निगाहें....
राहत कार्य के नाम पर...
हाथ की घडियां और पाकेट का पर्स
निकालने वाले लोगों की सक्रियता....
इतने में कारों का काफिला आया....
सबने कहा....
शायद मंत्री जी आये हैं...
हाँ.. वे ही हैं......
उन्होंने जाँच समिति गठित करने का दिया आश्वासन......
और मरने वालों के परिवारों को...
पचास पचास हजार का चेक ....
क्या यही है देश में...
नागरिकों के
"जान की कीमत"
वल्लभ... मई, सन् 1990

गरीब बच्चें

गरीब बच्चें

जनवरी की सुबह
हर तरफ घना कुहरा ...
और धुंध....
खाली सड़क...
लेकिन
इन सब की परवाह किये बिना.....
नंगे पैर ...
गंदे बदन पर
आधे अधूरे चीथड़ों के साथ ...
कंधे पर बडा झोला लिए...
रोज की तरह ...
आज भी निकल पड़े हैं.....
कूड़े की ढेर से
प्लास्टिक बटोरने.....
"गरीब बच्चे"
वल्लभ.... जुलाई 1990

भारतीय स्टोव

"भारतीय स्टोव"

तुम भी बड़े अजीब हो...
जाने कौन सा बैर है
तुम्हारा नवब्याहताओं से ?
जान के दुश्मन बन जाते हो ...
ससुराल में...
कभी नहीं सुना गया तुम्हारा फूटना ....
मायके में, या किसी..
कुवांरी लड़की के पास..
फिर क्या हो जाता है तुम्हे...
ससुराल में ?
आखिर क्यों विस्फोट करते हो ?
तुम कब सुधरोगे ?
" भारतीय स्टोव"
वल्लभ...जुलाई, सन् 1990